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टूलकिट मामला: शांतनु के खिलाफ दिल्ली में गैर जमानती वारंट, दिल्ली पुलिस ने कहा- दिशा ने ही ग्रेटा को भेजी थी किट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में निकिता जैकब और शांतनु के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है। पुलिस दोनों को तलाश रही है और लोकेशन मिलते ही इन्हें गिरफ्तार करेगी। इससे पहले रविवार को दिल्ली पुलिस ने बंगलुरु से दिशा रवि को भी इस मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं अब शांतनु के वकील ने कहा कि जमानत के लिए वह बॉम्बे हाईकोर्ट के औरंगाबाद बेंच जाएंगे।

टूलकिट मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने सोमवार को अब तक हुई जांच के बारे में मीडिया के सामने जानकारी दी। साइबर सेल के ज्वाइंट CP प्रेम नाथ ने बताया कि जांच में ये भी बात सामने आई कि काव्य न्याय फाउंडेशन के संस्थापक एमओ धालीवाल अपने कनाडा में रह रहे सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया। उनका मकसद गणतंत्र दिवस से पहले और बाद में ट्विटर स्टॉर्म और डिजिटल स्टाइक करना था। इसी के मुताबिक टूलकिट बनाई गई, जो ग्रेटा थनबर्ग के हवाले से 3 फरवरी को सामने आई।  

ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट केस में एक्टिविस्ट दिशा रवि की गिरफ्तारी के दूसरे दिन दिल्ली पुलिस उनके करीबियों की तलाश कर रही है। नाथ ने बताया कि जांच के दौरान टूलकिट के ऑनलाइन मौजूद स्क्रीन शॉट्स की पड़ताल की गई है और जांच में प्राप्त जानकारी मिलते ही इस टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट की संपादक निकिता जैकब के खिलाफ सर्च वारंट जारी कर केस के आयोग समेत एक टीम को मुंबई भेजा गया। उनके पास से 2 लैपटॉप और 1 आईफोन मिला है। निकिता ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में ट्रांजिट बेल की अर्जी दायर कर दी है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

टेलीग्राम के जरिए भेजी गई थी टूलकिट
पुलिस ने ये भी बताया कि दिशा रवि ग्रेटा थनबर्ग को जानती थीं इसलिए उनसे कहा गया कि वो ग्रेटा को टूलकिट भेजें। तब दिशा ने ही ग्रेटा को टेलीग्राम एप के जरिए टूलकिट भेजा। पुलिस ने ये भी बताया कि गूगल ने टूलकिट को लेकर कई सवालों का जवाब दे दिया है, अन्य के जवाब भी जल्द ही मिल जाएंगे।

दिशा और निकिता ने खालिस्तानी समर्थक धालीवाल के साथ की थी बैठक
नाथ ने बताया कि 11 जनवरी को काव्य न्याय फाउंडेशन ने जूम मीटिंग किया, जिसमें निकिता, शांतनु ,धालीवाल और अन्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। इसका मकसद 26 जनवरी के मौके पर ट्विटर पर भारी जन समर्थन जुटाना था। धालीवाल का मकसद किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना था। सर्च में पता चला कि निकिता, शांतनु और दिशा ने गूगल टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट बनाया था।

साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बनाया व्हाट्सएप ग्रुप
दिल्ली पुलिस ने कहा कि पूरी साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया। पुलिस का दावा है कि दिशा और निकिता के लैपटॉप से आपत्तिजनक सूचनाएं बरामद की गई हैं।

कौन हैं निकिता जैकब
निकिता जैकब एक कार्यकर्ता और वकील हैं। टूलकिट विवाद छिड़ने पर निकिता ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया था। ऐसा दावा किया जा रहा कि निकिता ने अपनी ट्विटर प्रोफाइल पर खुद का परिचय बंबई उच्च न्यायालय की वकील, पर्यावरणविद और आम आदमी पार्टी (आप) से जुड़े होने के तौर पर दिया था। नई प्रोफाइल में उन्होंने आप से जुड़े होने की बात हटा दी है।

कौन हैं दिशा रवि
नार्थ बंगलूरू के सोलादेवना हल्ली इलाके की रहने वाली व जलवायु कार्यकर्ता दिशा ने माउंट कार्मल कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की है। इस समय वह गुड माइल्क कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के समय वह अपने घर में ही काम कर रही थीं। दिशा रवि के पिता मैसूर में एक एथलेटिक कोच हैं और मां एक गृहिणी हैं। दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि की गिरफ्तारी को लेकर बंगलूरू पुलिस को जानकारी दी थी।

शांतनु
शांतनु भी एक कार्यकर्ता हैं। उनके खिलाफ दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को गैर जमानती वारंट जारी किया है। पुलिस फिलहाल उनकी तलाश कर रही है।

टूलकिट में क्या था
टूलकिट में बताया गया था किसान आंदोलन में सोशल मीडिया पर समर्थन कैसे जुटाया जाए। हैशटैग का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए और प्रदर्शन के दौरान क्या किया जाए और क्या नहीं, सब जानकारी इसमें मौजूद थी। तीन फरवरी को कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों का समर्थंन करते हुए इस टूलकिट को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। बाद में इस टूलकिट को सोशल मीडिया ने प्रतिबंधित कर उसे डिलीट कर दिया था।



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Toolkit case: Delhi Police said - Disha had sent the kit to Greta
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source https://www.bhaskarhindi.com/national/news/toolkit-case-delhi-police-said-disha-had-sent-the-kit-to-greta-216224

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